Monday, April 5, 2010

दाने

भींच रखी है मुट्ठी मैंने,
वक़्त को फिसलने से रोकने को,
दाने दाने कर वो फिर भी खिसक रहा,
उड़ उड़ के साँसों के संग,
आँखों में है धस रहा.

Friday, April 2, 2010

नशा

मैंने तुझको देखा है जब से ,
कुछ खो गया है मुझसे ,
हर लम्हा तेरी तलब सी है ,
बदली नहीं है ज़िन्दगी ,
फिर भी अलग सी है.

Thursday, April 1, 2010

राही

लफ़्ज़ों के समंदर का राही हूँ,
कागज़ पे बिखरी स्याही हूँ,
हूँ अक्स अपने ही अरमानो का,
कुछ उम्मीदों का साकी हूँ.


खेलते हैं जज़्बात मेरे सीने में,

ठहरे हैं अश्क आँखों के ज़ीने में,
है जो ये जाल साँसों का,
कुछ निकला हूँ उससे कुछ बाकी हूँ

किस्सा

ज़िन्दगी को जब देखा करीब से,
तो     ये      एहसास     हुआ,
हँसना  रोना गिरना संभलना,
यही    तो     ज़िन्दगी     है,
फिर   भी   डरते    हैं    हम ,
जाने किससे या शायद खुद से ,
कहीं कुछ गलत ना हो जाए,
कुछ    टूट     ना     जाए ,
कुछ    छूट     ना     जाए.



Wednesday, March 31, 2010

आरज़ू

चमकते ख़्वाबों की रोशनी से ,
अरमानों के घर सजायेंगे,
और कुछ ना हो सका अगर,
एक दूजे का साथ निभाएंगे,
मुमकिन है ये आरज़ू मेरी,
ज़िन्दगी मुझे ये तो बता.

सिसकियाँ

अपनी तो बाकी ऐसे ही गुज़र जायेगी,
ना सही कोई, तन्हाई साथ निभाएगी,
अपने जीने की रकम युहीं अदा करेंगे,
सिसक लेंगे चुपके से बेजान रातों में.

Wednesday, March 24, 2010

घर

जिन्हें ढूँदती हैं नज़रें ये वो मंज़र नहीं है,

ना हमसफ़र ना हमराह कोई ये वो राह-ए-सफ़र नहीं है,

मैंने तो ख्वाब देखा था गुलिस्ताँ में आशियाँ का,

हर तरफ बिखरी हैं यहाँ लाशें ये वो घर नहीं है.

Tuesday, March 23, 2010

लम्हे

गुपचुप खिसकते लम्हों ने ,
देखो ये क्या कर दिया है ,
जो था जुदा सा मुझसे ,
उसे मुझसा कर दिया है.

Monday, March 22, 2010

कुछ अल्फाज़

पैबस्त हैं दिल में यादें तेरी, करता हूँ जिनसे मैं बातें तेरी,
अब तो एहसास तेरा हवाओं में है, दूर है तू फिर भी निगाहों में है,
मेरी रगों में तेरा प्यार बहता है, धडकनों को तेरा इंतज़ार रहता है,
है चेहरा तेरा दिल की हर एक दीवार पे , और बैठे हैं ख्वाब तेरे मन के हर एक तार पे,




Sunday, March 21, 2010

मंज़र

निगाहें  बहुत देर एक मंज़र पे ठहरी रही,
पलके जो झपकी ज़रा सी वो मंज़र कहीं नहीं,
कौन कहता है जो चाहो वो तुम्हे मिल जाएगा,
हसीं लम्हा ये ज़िन्दगी का सभी को मयस्सर नहीं.