Sunday, February 12, 2012

अश्क

तेरी आँखों के अश्क मेरी आँखों से गिरते रहे,
कुछ इस तरह हम जीते रहे मरते रहे,

रह रह के जो उड़ती थी खुशबु दामन से हयात की,
उन सोंधे लम्हों को अब हर लम्हा तरसते रहे...

Saturday, February 11, 2012

फ़साने

लोग कहते हैं की मुझे जिक्रे मोहब्बत करना था,
जो था मेरे दिल का हाल उनसे बयान करना था,
मेरे ख्यालों में भी ये बात कई दफा आई थी,
इसी तखय्युल  में कई रातें जागते हुए बितायी थी,
फिर भी लरजते होंठ रुक जाते थे ये बताने में ,
क्युकी डर था उसका नाम भी आएगा मेरे फ़साने में.

बात

वो सामने आये तो मगर , हम आँखों के जाम भर न सके,
दिल में थे जो जज़्बात, उनको पैगाम कर न सके,
रुके रुके से थे कदम, बेकाबू थी हर धड़कन,
की होंठ काँपे भी तो क्या, जो कहने थी बात वो कह न सके.

Thursday, February 9, 2012

रंज

रंज साँसों को है मुझसे तेरे जाने के बाद,
कितना भी रोया करू ये ठंडी नहीं होती.

भटकती रही उम्रें यूँ ही सरे बियाबान,
सजाओ कितना ही  राहें  मंजिल  नहीं होती.

Tuesday, October 18, 2011

आश्नाई

ए ज़िन्दगी मुझसे यूँ बेवफाई न कर,
दो कदम साथ चल रहनुमाई न कर.


बहुत  लम्बा है सफ़र हसरतों मेरा,
मंजिल को देख रास्तों से आश्नाई न कर.

धोखा

मत पूछिए हमारी मोहब्बत का हाल,
हम क्या कहते हैं वो क्या कहते हैं.

आईना देखकर यकीन आया,
चेहरे कितना धोखा करते हैं.

Sunday, October 16, 2011

मकाम

ज़िन्दगी हमारी एक रोज़ हमसे बुरा मान गयी,
जाने वो छुपा हुआ कौन सा राज़ जान गयी.


हमें उम्र लगी समझने में जिन्हें,
उसने नज़र भर देखा और पहचान गयी.


बदला बहुत मैंने अपनी राहों को मगर,
हर राह मुझे लेकर उसी मकाम गयी.

धारियां

रह रह के चढ़ता है बुखार क्या कीजिये,
मौसमी है ये प्यार अजी क्या कीजिये.


करती हैं चुगली ये चेहरे की धारियां,
यूँ रात भर हुजुर न जगा कीजिये.


किसी का हुस्न है नया किसी की ज़ुल्फ़ में सबा,
इन बेतुकी बातों से इश्क न किया कीजिये.

दूकान

हर एक शय से यही बयान होता है,
आदमी जिंदा एक दूकान होता है.


हरे शज़र को पूछता नहीं कोई,
सुखी लकड़ियों का ऊँचा दाम होता है.


न तू मुझे सुन सके न मैं तुझे सुन सकूँ,
पत्थर की दीवारों का यही काम होता है.

आज़्माइन्द

दिल ऐब तराश तेरे साये से हम इतना डरते हैं,
हो न खबर हवाओं को यूँ गुमनाम गुज़रते हैं.


मांग बैठे सबूत खुदा से खुदाई का,
मग्रूर आज़्माइन्द भी कभी सुधारते हैं.


जिसने होठों पर रखली एक बूँद भी शराब की,
वो पीने वाले फिर किस रोज़ मुकरते हैं.