अल्फ़ाज़
एक नज़रिया !
Showing posts with label
dhokha
.
Show all posts
Showing posts with label
dhokha
.
Show all posts
Tuesday, October 18, 2011
धोखा
मत पूछिए हमारी मोहब्बत का हाल,
हम क्या कहते हैं वो क्या कहते हैं.
आईना देखकर यकीन आया,
चेहरे कितना धोखा करते हैं.
Sunday, October 16, 2011
आदमी
आयी जो फासलों पर ज़रा सी रौनकें नज़र,
ज़मीर के चिराग बुझा गया आदमी.
बची थी हाथों में कुछ बूंदें हयात की,
उन्हें भी घोल के शराब पी गया आदमी.
मिली थी एक शाम ही बेसाख्ता मोहब्बत की,
उसे भी आदत से धोखा दे गया आदमी.
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)