Saturday, May 29, 2010

पनाह

ठहरे हुए लफ़्ज़ों को सोचता हूँ,
तेरा पता दे दूँ,
कोने में सुलगती यादों को,
थोड़ी हवा दे दूँ,
मिल जायेंगी तेरी सांसें,
मेरी साँसों में,
आ तुझे अपनी बाहों में पनाह दे दूँ.

Monday, May 24, 2010

kathni aur karni ka fark

this is what we say and what we want others to achieve.  now have a look at what we do!!!


Thursday, May 20, 2010

ज़िन्दगी

मुट्ठी में अरमानों कि ठंडी राख,
साँसों कि उलझी सी साख,
मिल जायेगी धडकनों को आवाज़,
थोड़ी सी ज़िन्दगी दे दे.

Monday, April 5, 2010

दाने

भींच रखी है मुट्ठी मैंने,
वक़्त को फिसलने से रोकने को,
दाने दाने कर वो फिर भी खिसक रहा,
उड़ उड़ के साँसों के संग,
आँखों में है धस रहा.

Friday, April 2, 2010

नशा

मैंने तुझको देखा है जब से ,
कुछ खो गया है मुझसे ,
हर लम्हा तेरी तलब सी है ,
बदली नहीं है ज़िन्दगी ,
फिर भी अलग सी है.

Thursday, April 1, 2010

राही

लफ़्ज़ों के समंदर का राही हूँ,
कागज़ पे बिखरी स्याही हूँ,
हूँ अक्स अपने ही अरमानो का,
कुछ उम्मीदों का साकी हूँ.


खेलते हैं जज़्बात मेरे सीने में,

ठहरे हैं अश्क आँखों के ज़ीने में,
है जो ये जाल साँसों का,
कुछ निकला हूँ उससे कुछ बाकी हूँ

किस्सा

ज़िन्दगी को जब देखा करीब से,
तो     ये      एहसास     हुआ,
हँसना  रोना गिरना संभलना,
यही    तो     ज़िन्दगी     है,
फिर   भी   डरते    हैं    हम ,
जाने किससे या शायद खुद से ,
कहीं कुछ गलत ना हो जाए,
कुछ    टूट     ना     जाए ,
कुछ    छूट     ना     जाए.



Wednesday, March 31, 2010

आरज़ू

चमकते ख़्वाबों की रोशनी से ,
अरमानों के घर सजायेंगे,
और कुछ ना हो सका अगर,
एक दूजे का साथ निभाएंगे,
मुमकिन है ये आरज़ू मेरी,
ज़िन्दगी मुझे ये तो बता.

सिसकियाँ

अपनी तो बाकी ऐसे ही गुज़र जायेगी,
ना सही कोई, तन्हाई साथ निभाएगी,
अपने जीने की रकम युहीं अदा करेंगे,
सिसक लेंगे चुपके से बेजान रातों में.